Excerpt for Dil Dariya by , available in its entirety at Smashwords



दिल दरिया

(कविता संग्रह)



धर्मेन्द्र राजमंगल











Rajmangal Publishers

www.rajmangalpublishers.org

Copyright © Dharmendra Rajmangal 2018

All Right Riserved

This is a work of fiction. Names, characters, businesses, places, events, locales, and incidents are either the products of the author’s imagination or used in a fictitious manner. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental.This book is sold subject to the condition that it shall not, by way of trade or otherwise, be lent, resold, hired out, or otherwise circulated without the publisher’s prior consent in any form of binding or cover other than that in which it is published and without a similar condition including this condition being imposed on the subsequent purchaser. Under no circumstances may any part of this book be photocopied for resale.

The printer/publishers, distributer of this book are not in any way responsible for the view expressed by author in this book. All disputes are subject to arbitration, legal action if any are subject to the jurisdiction of courts of Aligarh uttar pradesh.

First Published in Feb 2018

by

Rajmangal Publishers

Aligarh (UP) India. Ph.No. +91– 7017993445

www.rajmangalpublishers.org

rajmangalpublishers@gmail.com



ISBN :

Cover Design by : Dharmendra

बिन साजन के सावन कैसा



बारिश की बूंदों से जलती हीय में मेरे आज सुलगती

पीपल के पत्तो की फडफड जैसे दिल की धडकन धडधड

चूल्हे पर चढ़ गयी कढाई दूर हुई दिल की तन्हाई

लेकिन सबकुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.



चलती है सौंधी पुरबाई हुए इकट्ठे लोग लुगाई

उनके वो और वो हैं उनकी खड़ी अकेली मैं हूँ किनकी

हाय रे हाय ये शाम का ढलना रात बिरहिनी सुबह का खिलना

लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.



रात में मोहे चाँद चिढाता दिन में सूरज सिर चढ़ आता

आँखों में यादों के डोरे साजन मैं तुम चाँद चकोरे

बहुत हुई तेरी रुसवाई जाता सावन ओ हरजाई

लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.



सास ननद का ताने कसना तेरी यादें खट्टी रसना

सखी सहेली करें ठिठोली मोहे न सुहाए उनकी बोली

बारिश की ठंडी बौछारें सिहरन मुझको मारे डारें

लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.



अब के आजा ओरे सईयाँ डाल दे मोरे गले में बहियाँ

मैं बन जाऊं तेरी चेरी सौलह की हो जाऊं छोरी

लाल लिपस्टिक मांग सिंदूरी रेशमी जुल्फें बदन अंगूरी

लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.



सजनी से साजन का मिलना शरबत में चीनी का घुलना

रात चांदनी और मिलन सजन का मन से मन और मिलन बदन का

मैं बगिया की हुई मोरनी साजन के दिल की हूँ चोरनी

लेकिन सब कुछ लागे ऐसा बिन साजन के सावन कैसा.

बच्चों बारिस आएगी



बच्चों बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी

रिमझिम से पानी बरसेगा रह रह कर बादल गरजेगा

बूंदों में तुम खूब नहाना कागज की तुम नाव बहाना

लेकिन इतना रखना ध्यान मस्ती में न होना शैतान

कोई शरारत तुमने की तो माँ फिर से चिल्लाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



बगियों में फिर फूल खिलेंगे मक्खी खटमल खूब उड़ेंगे

रेंग रेंग कर सांप चलेगा कछुआ तब मुस्काएगा

मछली की तब होगी दिवाली तितली तब होगी मतवाली

तितली को न हाथ लगाना ये फिर से डर जाएगी

बच्चों बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



खेतों की रंगत निखरेगी फसल धान की लहराएगी

डब्बो में तुम पानी भरना तालाबों पर जा पटकना

वाटर लेवल बढ़ जायेगा मस्त मजा तब आएगा

पानी की किल्लत की फिर से ऐसी तैसी हो जाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



लहर लहर कर नहर चलेगी तुम्हें देख कर वो हँस देगी

पेड़ पेड़ पर वेल का चलना माँ का रोज पकौड़े तलना

बर्षा का हो खूब बहाना पापा का ड्यूटी न जाना

झूले पर बैठी गुड्डी तो फिर से मचक बढ़ाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



हरी फसल से खेत खिलेगा लाला जी का कर्ज मिटेगा

कृषको की तब शान बढ़ेगी धन्य धरा कहलाएगी

तालों में पानी उफनेगा टर्र टर्र मेढक फेंकेगा

प्यारे ऐसा तब होगा जब फिर से बदली छाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



पानी में भैंसों का रेला गलियों में टिक्की का ठेला

कपड़े गीले छप्पर गीले गुड के डेले होंगे सीले

ढोलक पर जब थाप लगेगी रसियों की फिर खूब जमेगी

पंगत की दावत में भैय्या फिर से रौनक आएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



गर्म जलेबी इन गाँव का मेला उन्हें खायेगा गुरु का चेला

देख के इमली लार टपकती मन करता कि मार दे झपटी

एक रूपये का पान मिलेगा होंठों पर लाली सा खिलेगा

रात जश्न की होगी दददू फिर से गोरी गाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



देखके बदली चिड़िया नाची बैठी चाय बनाती चाची

छोटू को छुट्टी की छूट लल्लन से लड्डू की लूट

मम्मी की नजरों को जाँच पापा से लो रुपया पाँच

बागों में कोयलिया फिर से कूह कूह चिल्लाएगी

बच्चो बारिश आएगी फिर से ठंडक लाएगी.



दूध मलाई लल्ला खाता बजरंगी सी ताकत पाता

बाबा के कपड़े हैं तंग देख के अम्मा रह गयी दंग

मौसम के मन का मिजाज सुन भंवरा क्या करता उधेड़ बुन


Purchase this book or download sample versions for your ebook reader.
(Pages 1-8 show above.)