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हाइकू (Haiku)

देवी नागरानी

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हाइकू (Haiku)

देवी नागरानी

Copyright@2018 Devi Nangrani

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हाइकू (Haiku)

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लेखिका परिचय

भाग

भाग

देवी ननगरानी और लघु कथाएं



लेखिका परिचय



देवी नागरानी

जन्मः ११ मई, १९४१, कराची (तब भारत)

शिक्षाः बी.. अलीं चाइल्ड, व गणित में विशेष डिग्री, न्यूजर्सी से। मातृभाषाः सिंधी, भाषाज्ञान: हिन्दी, सिन्धी, गुरमुखी, उर्दू, तेलुगू, मराठी, अँग्रेजी, सम्प्रतिः शिक्षिका, न्यू जर्सी. यू.एस.(सेवानिवृत)

प्रकाशित पुस्तकें: सिन्धी संग्रह:

ग़म में भीगी ख़ुशी (ग़ज़ल-2007)

उड़ जा पंछी (भजनावली-2007)

आस की शम्अ (ग़ज़ल-2008)

सिंध जी आऊँ जाई आह्याँ (कराची-2009)

ग़ज़ल--- (ग़ज़ल -2012)

माँ कहिं जो बि नाहियाँ (कहानी-2016) किताबी समालोचनाएं (--प्रेस )

हिन्दी संग्रह: चराग़े-दिल (ग़ज़ल-2007)

दिल से दिल तक (ग़ज़ल-2008),

लौ दर्दे-दिल की (ग़ज़ल-2008)

भजन-महिमा (भजनावली-2012))

ऐसा भी होता है (कहानी -2016)

सहन--दिल (ग़ज़ल-2017)

The Journey (अंग्रेजी काव्य-2009)

अनुवाद: हिन्दी से सिन्धी अनुवाद:

बारिश की दुआ (कहानी संग्रह-2012)

अपनी धरती (कहानी संग्रह-2013)

रूहानी राह जा पांधीअड़ा (काव्य-2014)

बर्फ़ जी गरमाइश (लघुकथा-2014)

आमने- सामने (काव्य का हिन्दी-सिंधी अनुवाद-2016), आँख ये धन्य है (नरेंद्र मोदी काव्य- 2017)

चौथी कूट (कहानी संग्रह-प्रकाशन-साहित्य अकादमी),

सिन्धी से हिन्दी अनुवाद:

और मैं बड़ी हो गयी (कहानी-2012)

पन्द्रह सिन्धी कहानियाँ (कहानी-2014)

सिन्धी कहानियाँ (कहानी-2014)

सरहदों की कहानियाँ (कहानी-2015)

भाषाई काव्य सौंदर्य की पगडंडियाँ (काव्य-2015)

अपने ही घर में (कहानी-2016)

दर्द की एक गाथा (कहानी 2016)

एक थका हुआ सच (अतिया दाऊद काव्य -2016)

दर्द की लकीरें (विभाजन की कहानियाँ -–प्रेस )

अहसास के दरीचे (प्रांतीय-विदेशी कहानियाँ-प्रेस)

रूमी–मसनवी (अंग्रेजी से हिंदी-प्रेस)

अन्य अनुवाद:

सफ़र- (अङ्ग्रेज़ी काव्य Journey का हिन्दी-सिंधी अनुवाद--ध्रु तनवाणी-2016)

सिन्धी कथा (सिन्धी कहानी का मराठी अनुवाद- डॉ. विध्या केशव चिट्को-2016)

सम्मान-पुरुसकार:

अंतराष्ट्रीय हिंदी समिति, शिक्षायतन व विध्याधाम संस्था NY -काव्य रत्न सम्मान, काव्य मणि- सम्मान- “Proclamation Honor Award-Mayor of NJ, सृजन-श्री सम्मान, रायपुर -2008, काव्योत्सव सम्मान, मुंबई -2008, “सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन“ में सम्मान, मुंबई -2008, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद –पुरुस्कार-2009, “ख़ुशदिलान--जोधपुर” सम्मान-2010, हिंदी साहित्य सेवी सम्मान-भारतीय-नार्वेजीयन सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम, ओस्लो-2011, मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादेमी सम्मान-2011, जीवन ज्योति पुरुसकार, गणतन्त्र दिवस-मुंबई-2012, साहित्य सेतु सम्मान -तमिलनाडू हिन्दी अकादमी-2013, सैयद अमीर अली मीर पुरुस्कार- मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति-2013, डॉ. अमृता प्रीतम लिट्ररी नेशनल अवार्ड, नागपुर-2014, साहित्य शिरोमणि सम्मान-कर्नाटक विश्वविध्यालय, धारवाड़-2014, विश्व हिन्दी सेवा सम्मान-अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ,यू.पी-2014, भाषांतर शिल्पी सारस्वत सम्मान- भारतीय वाङमय पीठ-कोलकता-जनवरी 2015, हिन्दी सेवी सम्मान –अस्माबी कॉलेज, त्रिशूर-केरल- सितंबर 2015, हिंदी गौरव सम्मान-साठे कॉलेज, मुंबई-मार्च 2017, ‘हिंदी गौरव सम्मान’ विश्वभाषा साहित्य और रामकथा-अन्तराष्ट्रीय संयोग्श्थी-. दीनदयाल महाविश्वविध्यालय, सागर (.,) april २०१७

Devi Nangrani

323 Harmon Cove Towers

Secaucus, NJ 07094

dnangrani@gmail.com



भाग १



1

घर-घर में

वेद व्यास रचता

महाभारत

2

हम पांडव

कौरव भी हम ही

सारथी मन

3

सोच प्रधान

रामायण रचे या

महाभारत

4

मनमें खोट

विचार कर्म भ्रष्ट

मैं अमानुष

5

भाग्य-विधाता

भाग्य रेखाएं खींचे

जैसे बालक

6

शब्द जाल ने

रचा महाभारत

का इतिहास

7

क्यों लगता है

रिश्तों का मैदान भी

रण-भूमि सा?

8

दारू व दोस्ती

पुरानी जितनी हो

उतनी मस्ती

9

ना पहचाने

पाप-पुण्य और

मर्ज़

10

शब्द जाल ने

रचा महाभारत

का इतिहास

11

वही है घर

दिल’ जिसका होगा

रौशनदान

12

आज ज़रूरत

रोटी, कपड़ा, मकान

हर इन्सां की

13

नया अध्याय

ज़िंदगी की किताब

रोज़ पढ़ाती

14

कर्म पे रहे

महानता निर्भर

उम्र पे नहीं

15

प्यार के बीज

नफ़रत की फ़स्ल

नाबूद करे

16

थके क़दम

आशियाँ ऐ ज़िंदगी

कौन से गाम?

17

बहार में भी

तुझे मौत ढूंढती

बनके खिजाँ

18

भर-भर के

काँटों के प्यालों से पी

थी खुशी मैंने

19

छनक उठी

बैरन पैजनियाँ

पी को पुकार

20

कभी न सूनी

माँग हो, न गोद हो

न ही जंग हो

21

बेटी है गाय

अगरचे सच है

भ्रूण हत्या क्यों?

22

सइरा में क्यो

जीवन टटोलता

ये नागफ़नी?

23

नाश- विनाश

का एक ही कारण

वही अणु है

24

माँ की दुआ में

खुदा की रहमतें

शामिल हुईं

25

नारों का देश

जनता में एकता

फूट घरों में

26

बेनाम रिश्ते

करते बदनाम

रिश्तों के नाम

27

मर्ज़ी के बिना

आज़ादी लगती है

शाही गुलामी

28

वो जीत गया

जिसने मन को है

जग में जीता

29

वक़्त के साथ

उम्र भर पढ़ना

जीस्त का बाब

30

ख़्वाब मेरे

ख्वाहिश की कैद में

घुट रहे हैं

31

एक तोड़ोगे

कई नए उगेंगे

तुलसी पत्ते

32

कुर्सी बदली

सरकार बदली

बदले लोग

33

आतंकवाद

हथियार बना लेता

है इंसान को

34

शोक का पौधा

उगा है निराशा के

रेगिस्तान में

35

बालक आज

रच रहा इतिहास

नये युग का

36

मासूमियत

शातिर गलियों में

कहाँ खो गयी?

37

हाथों में लिये

भोले-भाले बच्चे

बन्दूकें फिरें

38

आवश्यकता

अविष्कार की बनी

जन्मदातिनी

39

दुनिया बाज़ार

घर बने दुकान

सब बिकाऊ

40

घास का घर

सिगरेट सुलगा

फूंके बालक

41

कौन बनेगा

अपंग-व्यवस्था का

करोड़पति

42

मुआ ज़मीर

अपंग मानवता

लोग हैं मुर्दे

43

गुरबत को

बनाकर निवाला

अमीरी खाये

44

क्या समझेंगे

ख़ामोशी की ज़ुबान

सन्नाटे कभी?

45

तेल श्रद्धा का

विश्वास का दीप

दोनों आरती

46

सजी ज़मीन

ओढ़कर चुनरी

सब्ज़ पतों की

47

सजा आईना

पलकें झुकाए क्यों

शरमा रहा ?

48

नर्म हवाएं

फूल के होंठ छुए

ख़ुशबू फैले

49

हाथों में दीप

मन में कुटिलता

आरती फिरे

50

ग्रीष्म ऋतू के

पसीने छूट रहे

सर्दी में आज


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