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Excerpt for मेरी कलम रो रही है (काव्य संग्रह) by , available in its entirety at Smashwords



प्रकाशक
वर्जिन साहित्यपीठ
78, अजय पार्क, गली नंबर 7, नया बाजार,
नजफगढ़, नयी दिल्ली 110043


सर्वाधिकार सुरक्षित
प्रथम संस्करण - मई 2018
ISBN

कॉपीराइट © 2018
वर्जिन साहित्यपीठ




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मेरी कलम रो रही है
(काव्य संग्रह)






कवि
रूपेश कुमार











अपनी बात



"मेरी कलम रो रही है" कविता संग्रह प्रस्तुत करते हुए मुझे अतीव प्रसन्नता हो रही है। मेरी ये कविताएँ साहित्य के हर पहलू को छूती हुई मानव चेतना को पुष्ट करती जाती हैं। जहाँ सागर की विशालता हो, वहाँ एक बूंद के रूप में स्मृतियों में अंकित चंद भावनाओं को उकेर कर मैं आशा करता हूँ कि मेरे आत्म विश्वास का यह तुहिन कण भी सागर की अनंत धाराओं में शनै शनै चलते रहने का विश्वास न खोएगा !

"मेरी कलम रो रही है " को वर्जिन साहित्यपीठ ने प्रकाशन हेतु आमंत्रित किया है। मैं ललित मिश्र महोदय के प्रति आभारी हूँ जिनका मार्गदर्शन नवलेखन के लिए प्रसाद बना हुआ है !

"मेरी कलम रो रही है'' को मेरे पिता श्री भीष्म प्रसाद एव माताजी श्रीमती बिन्दा देवी के चरणों में समर्पित करता हूँ जिन्होंने अपना प्यार, दुलार, स्नेह व आशीर्वाद देकर मुझे साहित्य की ओर अग्रसर होने के योग्य बनाया। मैं उन लोगों का भी आभारी हूँ जिन्होंने मेरी छोटी-छोटी रचनाओं पर मुझे सम्मानित किया। राजभाषा पीठ इलाहाबाद के अध्यक्ष महोदय डॉक्टर संतकुमार टंडन रसिक जी का मैं आभारी हूँ जिन्होंने मुझे मेरी पहली रचनाओं पर मुझे सम्मानित किया। अर्णव कलश एसोसिएशन के नवल पाल प्रभाकर जी का भी आभारी हूँ जिन्होंने मुझे क्षणिका पिरामिड सिखाया एवं सम्मानित किया ! मैं साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह का भी आभारी हूँ जिन्होंने मुझे साहित्य लेखन में प्रोत्साहित व सम्मानित किया।

मैं अपने पूरे परिवार जिसमें मेरे बड़े भैया शिक्षक मुन्ना कुमार एवं भारतीय रेलवे में कार्यरत राजन कुमार रिसर्च स्कॉलर प्रशांत कुमार का आभारी हूँ जिन्होंने मेरी साहित्यिक दुनिया के रास्तों को प्रशस्त कर मेरा उत्साह बढ़ाया !

मैं आभारी हूँ ''मध्यांतर के गीत (राग फेसबुकिया)'' के कवि दीपक कुमार का जिन्होंने मेरी कविताओं को संशोधित किया और कदम-कदम पर मेरा मार्गदर्शन किया।

इन्हीं शब्दों के साहित्य के विशाल सागर में अपनी योग्यता के तुहिन कण प्रवाहित करता हूँ इस विश्वास के साथ कि लेखन जगत में नवोदित रचनाकारों को भी को स्वीकृति मिलेगी !



रूपेश कुमार

पुरानी बाजार चैनपुर, सीवान, बिहार














रूपेश कुमार

पिता: श्री भीष्म प्रसाद: माता: बिन्दा देवी

9006961354

rupeshkumar000091@gmail.com

rupeshkumar01991@gmail.com

पता: पुरानी बाजार चैनपुर, पोस्ट - चैनपुर, जिला - सिवान (बिहार)

शिक्षा: स्नातकोत्तर, भौतिकी (राजेन्द्र कॉलेज छपरा, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, बिहार)









साहित्यिक परिचय

काव्य सरस्वती सम्मान (2010), कला आराधक सम्मान (2010), सिवान रत्न सम्मान (2010) (अखिल भारतीय कला सम्मान परिषद, कप्तांगंज, .प्र)

भारती ज्योति सम्मान (2010), भारती भूषण सम्मान (2014) (राष्ट्रीय राजभाषा पीठ, इलाहाबाद)

रवीन्द्र नाथ ठाकुर क्षणिका सम्मान (2017) (अर्णव कलश एसोसिएशन, हरियाणा )

महफ़िल ए गजल सम्मान, दितीय स्थान (2017), (महफिल ए गजल साहित्य समागम, अौरेया, .प्र)

बाबू बालमुकुन्द गुप्त हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान (2017) (अर्णव कलश एसोसिएशन, हरियाणा)

महफ़िल ए गजल सम्मान, प्रथम स्थान (2017) (महफिल ए गजल साहित्य समागम, अौरेया, .प्र)

राष्ट्र चेतना सम्मान (2018), श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान (2018), श्रेष्ठ टिप्पणीकार सम्मान (2018) (साहित्य संगम संस्थान, इंदौर)

भक्ती गौरव सम्मान (2018) (साहित्य संगम संस्थान, दिल्ली)

































काश तुम जाते इस बार !



काश तुम आ जाते इस बार,

मेरे दिल में समा जाते इस बार,

जिंदगी बहुत छोटी है,

हमसे मिल पाते इस बार !



जिंदगी के रंग बहुत हैं,

दिल्लगी के संग बहुत हैं,

हो जाते हम दोनों एक,

काश तुम आ जाते इस बार !



मौसम बेगाने होते हैं,

खुद से अनजाने होते हैं,

कब बदल जाए कोई नहीं जाने,

काश तुम आ जाते इस बार !



प्रकृति की रीत बन,

प्रियतम की प्रीत बन,

मेरे अभिन्न मीत बन,

काश तुम आ जाते इस बार !


























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(Pages 1-8 show above.)